हाल ही में देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में शुमार NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के प्रमुख और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने पेपर लीक को रोकने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और नया सुझाव दिया है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर तकनीकी बदलाव करने की सख्त जरूरत है।
नंदन नीलेकणी का पेपर लीक रोकने का नया फॉर्मूला
नंदन नीलेकणी के अनुसार, जब पारंपरिक तरीके से कोई प्रश्न पत्र महीनों पहले तैयार किया जाता है, तो उसके लीक होने या बिकने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस समस्या की जड़ तक जाते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि:
- क्वेश्चन बैंक का निर्माण: परीक्षा के लिए एक विशाल प्रश्न बैंक (Question Bank) तैयार किया जाए।
- अंतिम समय में पेपर सेट करना: परीक्षा वाले दिन या ठीक आखिरी समय में एल्गोरिदम या AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से प्रश्न पत्र तैयार किया जाए।
- लीक की संभावनाओं पर लगाम: जब प्रश्न पत्र पहले से छपकर बाहर नहीं आएगा, तो उसके बिकने या लीक होने का लालच और खतरा दोनों समाप्त हो जाएंगे।
डिजिटल परीक्षाओं के नए जोखिम और चुनौतियाँ
भले ही अंतिम समय में पेपर तैयार करने का यह विचार आकर्षक लगे, लेकिन इसके अपने तकनीकी और व्यावहारिक पहलू हैं:
1. साइबर सुरक्षा और हैकिंग का खतरा
जब परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, तो पेपर लीक का खतरा प्रिंटिंग प्रेस से हटकर सर्वर, नेटवर्क और डेटाबेस पर आ जाएगा। ऐसे में हैकिंग, डेटा चोरी और आंतरिक खतरों (Internal Threats) से निपटना बड़ी चुनौती होगी।
2. गुणवत्ता और कठिनाई स्तर (Difficulty Level)
लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा क्वेश्चन बैंक तैयार करना जिसमें हर प्रश्न की गुणवत्ता, कठिनाई स्तर और निष्पक्षता एक समान हो, एक बेहद जटिल कार्य है।
3. NTA की सुदृढ़ संरचना
सुप्रीम कोर्ट ने भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि पूरी व्यवस्था में स्थायित्व सबसे जरूरी है। बिना स्थायी स्टाफ और फुल-टाइम डायरेक्टर के इन सुधारों को जमीन पर उतारना कठिन हो सकता है।
पुरानी सिफारिशें बनाम नई उम्मीदें
गौरतलब है कि 2024 के NEET पेपर लीक विवाद के बाद ISRO के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में भी एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई थी, जिसने परीक्षा सुधार, डेटा सुरक्षा और NTA की संरचना पर 101 सिफारिशें दी थीं। हालांकि, नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाली टास्क फोर्स के ये नए सुझाव पुरानी रणनीतियों से काफी अलग हैं और परीक्षा प्रणाली में एक स्थायी बदलाव की ओर इशारा करते हैं।
निष्कर्ष
छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों की निगाहें अब टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि इन तकनीकी सुधारों को सही सुरक्षा उपायों और मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ लागू किया जाता है, तो देश की प्रतियोगी परीक्षाओं से पेपर लीक की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सकती है और छात्रों को एक निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली मिल सकती है।