CBSE पोर्टल की सुरक्षा में बड़ी सेंध: 19 वर्षीय छात्र ने उजागर की गंभीर खामियां

CBSE पोर्टल की सुरक्षा में बड़ी सेंध: 19 वर्षीय छात्र ने उजागर की गंभीर खामियां

हाल ही में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़ी एक खबर ने शिक्षा और साइबर सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है। एक युवा साइबर सुरक्षा रिसर्चर ने CBSE के संवेदनशील ऑनलाइन मूल्यांकन पोर्टल में गंभीर सुरक्षा खामियों का दावा किया है, जो लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती थीं। यह घटना डिजिटल युग में शैक्षिक प्रणालियों की सुरक्षा के महत्व पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ती है।

कौन हैं निसर्ग अधिकारी और उनका चौंकाने वाला दावा?

19 वर्षीय छात्र निसर्ग अधिकारी, जो एक साइबर सुरक्षा रिसर्चर हैं, ने दावा किया है कि उन्होंने CBSE की वेबसाइट को आसानी से हैक कर लिया। निसर्ग के इस ब्लॉग पोस्ट को उद्यमी डीडी दास ने अपने ट्विटर अकाउंट पर साझा किया, जिसके बाद यह खबर तेजी से वायरल हो गई। निसर्ग ने अपने ब्लॉग में बताया कि उन्होंने भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी ‘सर्ट इन’ (CERT In) को पहले भी, फरवरी में, इन खामियों के बारे में अलर्ट किया था।

CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल (OSM) में पाई गई खामियां

निसर्ग की 22 मई को जारी पोस्ट में दावा किया गया है कि CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल में कई गंभीर खामियां मौजूद थीं। हैरान करने वाली बात यह है कि CERT In को सूचित किए जाने के बावजूद, इन मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। 26 मई को, डीडी दास ने निसर्ग की पोस्ट को ट्विटर पर वायरल करते हुए लिखा कि CBSE की वेबसाइट पर मार्किंग स्कीम को कोई भी आसानी से देख या बदल सकता था।

पोर्टल का ‘पब्लिक’ होना और लॉगिन की कमजोर प्रक्रिया

निसर्ग ने अपने ब्लॉग में बताया कि CBSE का OSM पोर्टल (जहां शिक्षक ऑनलाइन कॉपियां चेक करते हैं) आश्चर्यजनक रूप से पूरी तरह से पब्लिक था। जब उन्होंने वेबसाइट के कोडिंग सिस्टम को देखा, तो वे चकित रह गए। निसर्ग के अनुसार, लॉगिन पेज पर केवल तीन चीजें मांगी जाती थीं: यूजर आईडी, स्कूल कोड और पासवर्ड, जिसके बाद एक ओटीपी आता था। बाहर से सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन असली समस्या कोडिंग के भीतर छिपी थी।

मास्टर पासवर्ड और OTP बाईपास: कैसे हुआ सुरक्षा का उल्लंघन?

पोर्टल में सबसे बड़ी खामी यह थी कि उसका एक ‘मास्टर पासवर्ड’ खुलेआम कोडिंग के एक हिस्से में रखा हुआ था। इसे कोई भी आसानी से देख सकता था।

  • मास्टर पासवर्ड का उपयोग: निसर्ग ने दावा किया कि CBSE पोर्टल पर इस मास्टर पासवर्ड का उपयोग करने पर ओटीपी की जरूरत ही खत्म हो जाती थी।
  • परीक्षक खातों तक आसान पहुंच: इसके बाद, किसी भी एग्जामिनर (कॉपी चेक करने वाले शिक्षक) के अकाउंट में आसानी से प्रवेश किया जा सकता था। इसके लिए केवल एक यूजर आईडी और स्कूल कोड चाहिए था, जो आसानी से इंटरनेट पर मिल जाता है।
  • OTP सिस्टम का दिखावा: पोर्टल का ओटीपी सिस्टम भी केवल एक दिखावा था। यानी, जो ओटीपी आपके फोन पर आना चाहिए वह वेबसाइट पर ही देखा जा सकता था। कोई भी यूजर थोड़ी सी चालाकी से बिना ओटीपी डाले ही लॉगिन कर सकता था।

आंतरिक सुरक्षा मार्गों की कमी और डेटा से छेड़छाड़ का जोखिम

निसर्ग के अनुसार, इस एप्लिकेशन में और भी कई आंतरिक रूट थे जहां कोई ‘प्रॉपर प्रोटेक्शन रूट’ मौजूद नहीं था। CBSE पोर्टल पर जारी डैशबोर्ड, प्रोफाइल, इवेल स्क्रिप्ट्स व्यू और वेरिफिकेशन डैशबोर्ड ब्राउज़र स्टोरेज में जाकर आसानी से देखे जा सकते थे।

इस चूक के चलते, बिना असली पासवर्ड डाले केवल कुछ कमांड देकर पूरा अकाउंट नियंत्रित किया जा सकता था। इसका सीधा मतलब था कि कोई भी यूजर एग्जामिनर बनकर कॉपियों और मूल्यांकन डेटा के साथ आसानी से छेड़छाड़ कर सकता था, जिससे लाखों छात्रों के परीक्षा परिणामों और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।

लाखों छात्रों पर संभावित प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

CBSE के भारत में 33 हजार से अधिक स्कूल हैं और विदेशों में भी इनकी बड़ी संख्या है। इस एग्जामिनेशन सिस्टम का असर लाखों स्टूडेंट्स को प्रभावित करता है। डीडी दास द्वारा ट्विटर पर पोस्ट जारी करने के बाद, CBSE पोर्टल की सुरक्षा यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल युग में शिक्षा प्रणालियों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। ऐसी कमजोरियां न केवल डेटा गोपनीयता का उल्लंघन कर सकती हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य और शैक्षिक प्रक्रिया की अखंडता पर भी सवाल उठा सकती हैं। सरकार और शिक्षा बोर्डों को साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर अपनी प्रणालियों को मजबूत करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि छात्रों का विश्वास और शैक्षिक प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।

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