दिव्यांग छात्रों की शिक्षा: अधिकार, चुनौतियाँ और देशभर में विरोध प्रदर्शन क्यों?

दिव्यांग छात्रों की शिक्षा: अधिकार, चुनौतियाँ और देशभर में विरोध प्रदर्शन क्यों?

हाल के दिनों में, देशभर के विभिन्न हिस्सों से दिव्यांग छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही हैं। ये प्रदर्शन उनकी शिक्षा के बुनियादी अधिकारों और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर हैं। भोपाल से लेकर चंडीगढ़ और देहरादून तक, मूक-बधिर और दृष्टिबाधित छात्र व्यवस्था की कमियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। आइए विस्तार से जानें कि इन छात्रों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और वे क्यों आंदोलन करने पर मजबूर हैं।

भोपाल में बदहाल शिक्षा व्यवस्था का आईना

भोपाल के शासकीय दृष्टि बाधित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 190 छात्रों ने स्कूल की बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनके मुख्य आरोप चौंकाने वाले हैं:

  • शिक्षकों की भारी कमी: पहली से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए केवल 3 शिक्षक उपलब्ध हैं, जबकि स्वीकृत पद 5 शिक्षकों, दो व्याख्याताओं और प्रशिक्षकों के हैं।
  • कक्षाओं का अनियमित संचालन: छात्रों का आरोप है कि नियमित कक्षाएं नहीं लगतीं और कई बार शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल चलाते रहते हैं।
  • साइन लैंग्वेज शिक्षकों का अभाव: श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए यह सबसे गंभीर समस्या है। शिक्षकों को साइन लैंग्वेज नहीं आती और स्कूल में इंटरप्रेटर भी नहीं है, जिससे संवाद और शिक्षा दोनों बाधित होते हैं।
  • कमरों की कमी: स्कूल में कमरों की इतनी कमी है कि कई बार एक कमरे में दो से तीन कक्षाएं लगानी पड़ती हैं।
  • प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव: कंप्यूटर, ड्राइंग और सिलाई जैसे प्रशिक्षणों के लिए भी प्रशिक्षकों की कमी है।

प्राचार्य मोहम्मद इरफान ने शिक्षकों की कमी का कारण प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की वापसी बताया है, लेकिन छात्रों का भविष्य अधर में है।

चंडीगढ़ में गूंजी मूक-बधिर छात्रों की आवाज

12 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-19 स्थित वटिका स्पेशल स्कूल के मूक-बधिर छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर लगभग 3 घंटे प्रदर्शन किया। ये छात्र बोल और सुन नहीं सकते, इसलिए उन्होंने अपनी आवाज उठाने के लिए शोर मचाने का सहारा लिया। उनकी मुख्य समस्याओं में से एक थी इलेक्ट्रिक बस की चार्जिंग सुविधा का न होना, जिससे उसका नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा था। सोशल वेलफेयर विभाग और पुलिस की मदद से उनकी शिकायतें सुनी गईं, लेकिन सवाल यह है कि छात्रों को अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी इतना संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?

देहरादून: आरोप शारीरिक हिंसा और बदहाली के

राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD), देहरादून में दृष्टिबाधित छात्र-छात्राएं बीते पांच दिनों से अच्छी शिक्षा, शिक्षक और किताबों जैसी सुविधाओं को लेकर धरने पर बैठे हैं। यहां के हालात और भी चिंताजनक हैं:

  • शिक्षा और सुविधाओं की कमी: छात्रों को पर्याप्त किताबें, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और स्थायी निदेशक जैसी बुनियादी जरूरतें भी नहीं मिल रही हैं।
  • शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप: कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया है कि संस्थान में उनके साथ बुरा बर्ताव और शारीरिक हिंसा की जाती है, बच्चों को लात-घूंसों से मारा जाता है।
  • मल्टी-डिसेबल बच्चों की अनदेखी: मल्टी-डिसेबल बच्चों के लिए अलग यूनिट और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है, जिससे उनकी विशेष देखभाल नहीं हो पा रही है।
  • खराब भोजन और दुर्व्यवहार: छात्रावास के खाने की गुणवत्ता लगातार खराब है और डिस्पेंसरी में भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

प्रशासन के साथ दो दौर की बातचीत के बावजूद समाधान न होने से छात्र आंदोलन जारी रखने को मजबूर हैं और उन्होंने भूख हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

दिव्यांग छात्रों की शिक्षा का अधिकार: व्यवस्था पर सवाल

ये सभी घटनाएं भारत में दिव्यांग छात्रों की शिक्षा को लेकर एक गंभीर तस्वीर पेश करती हैं। जब किसी ऐसे विद्यार्थी को जिसकी भाषा साइन लैंग्वेज है, उसके शिक्षक को वही भाषा नहीं आती, तो शिक्षा का अधिकार जमीन पर कैसे लागू होगा? बच्चों को जिस मदद की जरूरत है, वह उन्हें नहीं मिल रही है। यह सिर्फ सुविधाओं की कमी का मामला नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और संवैधानिक अधिकारों के हनन का भी है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे ‘शर्मनाक’ बताया है और तत्काल समाधान की मांग की है।

निष्कर्ष: समावेशी शिक्षा की ओर एक कदम

शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, और दिव्यांग बच्चों के लिए तो यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इन विरोध प्रदर्शनों से यह साफ है कि शिक्षा व्यवस्था में समावेशिता और संवेदनशीलता की भारी कमी है। शिक्षकों की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव, आधारभूत संरचना की कमी और संवादहीनता जैसी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाना चाहिए। हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली का निर्माण करना होगा, जहां हर बच्चा, चाहे उसकी शारीरिक स्थिति कुछ भी हो, सम्मान के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके और अपने सपनों को पूरा कर सके।

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