NCERT क्लास 9 सामाजिक विज्ञान: भारतीय इतिहास और प्रतिरोध की नई गाथा

NCERT क्लास 9 सामाजिक विज्ञान: भारतीय इतिहास और प्रतिरोध की नई गाथा

शैक्षिक जगत में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है! नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने अपनी कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 2’ जारी की है। यह नई पुस्तक भारतीय इतिहास के प्रति एक ताज़ा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसमें पहले पढ़ाए जाने वाले कुछ यूरोपीय विषयों को हटाकर भारतीय शासकों के संघर्षों और रानियों की वीर गाथाओं को प्रमुखता दी गई है।

क्यों बदला गया पाठ्यक्रम?

पहले कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताबों में ‘इंडिया एंड द कॉनटेम्पररी वर्ल्ड’ जैसी पुस्तकें थीं, जिनमें फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और नाजीवाद का उदय जैसे यूरोपीय विषय पढ़ाए जाते थे। अब इन अध्यायों को काफी हद तक हटा दिया गया है या उन्हें संशोधित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को भारत के मध्यकालीन इतिहास और यहाँ के शासकों के संघर्षों से अधिक गहराई से परिचित कराना है। किताब में यह भी दावा किया गया है कि धार्मिक वजहों से भारत ने 7वीं सदी से लगातार हमलों का सामना किया है।

नई किताब में क्या है खास?

नई किताब ‘विरोध और लचीलापन’ (Resistance and Resilience) नामक एक अध्याय के साथ आती है, जो भारतीय इतिहास के अनसुने पहलुओं को उजागर करता है। इसमें मुख्य रूप से मध्यकालीन भारत पर हुए हमलों और उनके खिलाफ भारतीय शासकों व समुदायों के प्रतिरोध की कहानियों को शामिल किया गया है।

भारतीय शासकों का अदम्य साहस और प्रतिरोध

  • विभिन्न आक्रमणों का सामना: पुस्तक में बताया गया है कि 7वीं सदी के मध्य से अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं ने भारत पर आक्रमण किए। दक्कन, मालवा, कश्मीर और राजस्थान के भारतीय शासकों ने इन शुरुआती हमलावरों का वीरतापूर्वक सामना किया।
  • महान योद्धाओं की गाथाएं: नई किताब में राजपूतों, अहोम, विजयनगर साम्राज्य, मराठों, सिखों और जाटों के प्रतिरोध की कहानियों को विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें महाराणा प्रताप का अकबर के खिलाफ संघर्ष, लाचित बोरफुकन द्वारा 1671 में सरायघाट की लड़ाई में मुगल बेड़े को हराना, और मुगल अत्याचारों के खिलाफ सिखों के प्रतिरोध की कहानियाँ प्रमुख हैं।
  • रानी नायकी देवी से अब्बक्का चौटा तक: यह किताब चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी के संघर्ष को भी सामने लाती है, जिन्होंने 1178 में माउंट आबू के पास मुहम्मद गोरी को हराया था। इसी तरह, काकतीय साम्राज्य की रुद्रमा देवी, जिन्होंने 1262 से 1289 तक दिल्ली सल्तनत से संघर्ष किया, और उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा, जिन्होंने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया था, जैसी वीरांगनाओं की कहानियाँ भी इसमें शामिल हैं।
  • गुरुओं का बलिदान: सिख प्रतिरोध और गुरु अर्जुन देव व गुरु तेग बहादुर की शहादत के बारे में भी विस्तार से बताया गया है, जो 17वीं सदी की शुरुआत से मुगल राज्य के बढ़ते सामाजिक-सांस्कृतिक दखल के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध था।

आक्रमण और जन-संघर्ष

  • गज़नी और तुर्की हमले: किताब में महमूद गज़नी के भारत पर पहले हमले (1001 में हिंदू शाही वंश के जयपाल के खिलाफ) और 11वीं-12वीं सदी में उत्तरी व पश्चिमी भारत को तुर्की हमलों का सामना कैसे करना पड़ा, इसका भी उल्लेख है।
  • जाट विद्रोह: मुगल साम्राज्य के खिलाफ जाटों के विद्रोह को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है। गोकुल जाट के नेतृत्व में 1669 में गंगा-यमुना दोआब में हुआ यह विद्रोह भारी टैक्स और औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के कारण उत्पन्न हुआ था, और यह प्रतिरोध कई महीनों तक चला। 1686 में सिनसिनी और सोगर के जमींदारों के विद्रोह का भी जिक्र है।

देवी शक्ति और युद्ध की परंपरा

भारतीय परंपरा में देवी पूजा के महत्व को दर्शाते हुए, किताब में बताया गया है कि कैसे 7वीं सदी से कई राजा-राजकुमार लड़ाई के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के अन्य रूपों को बतौर रक्षक याद करते थे। इसमें बस्तर के शासक अन्नमराजा को उनकी तलवार माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से मिलने और विजयनगर के कुमार कंपन द्वारा सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से मिली तलवार का उपयोग करने का भी जिक्र है।

एक नया दृष्टिकोण?

इस नई किताब के बाद कुछ आलोचकों का तर्क है कि पहले ‘सहयोग और मिले-जुले कल्चर’ पर जोर दिया जाता था, लेकिन अब ‘हमला और प्रतिरोध’ के नजरिए को पढ़ाया जा रहा है। हालाँकि, NCERT का उद्देश्य छात्रों को भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं, विशेषकर यहाँ के योद्धाओं और प्रतिरोध की भावना से अवगत कराना है। यह पुस्तक नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के पूरे छह महीने बाद जारी की गई है, जबकि इसका पहला भाग जून में आया था।

यह महत्वपूर्ण है कि छात्र अपने देश के गौरवशाली इतिहास, संघर्षों और महान व्यक्तित्वों से परिचित हों। नई NCERT किताब उन्हें भारतीय समाज और संस्कृति की गहरी समझ प्रदान करेगी, साथ ही यह भी बताएगी कि कैसे हमारे पूर्वजों ने चुनौतियों का सामना किया और अपनी पहचान को बनाए रखा।

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