NEET PG 0 परसेंटाइल विवाद: क्या गुणवत्ता से समझौता हो रहा है?
24 सितंबर को जारी हुए NEET-PG 2026 के नतीजों ने एक बार फिर मेडिकल शिक्षा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। इस बार कुल 2,63,535 उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 258 कैंडिडेट्स के अंक 0 या उससे भी कम हैं। वहीं, सबसे कम स्कोर (-59) के साथ 0 पर्सेंटाइल लाने वाले कैंडिडेट भी हैं। पिछले तीन सालों के पैटर्न को देखें तो 0 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाले उम्मीदवारों को भी काउंसलिंग में मौका मिल सकता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या फिर से 0 परसेंटाइल वाले उम्मीदवारों को MD और MS जैसे महत्वपूर्ण पोस्ट-ग्रेजुएशन कोर्स करने का अवसर दिया जाएगा?
NEET PG का कट-ऑफ 0 परसेंटाइल क्यों किया गया?
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस (NBEMS) ने साल 2023 में COVID-19 महामारी के बाद पहली बार NEET-PG का क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाकर 0 कर दिया था। इस फैसले से वे उम्मीदवार भी काउंसलिंग के लिए पात्र हो गए थे, जिनके अंक बहुत कम या नेगेटिव थे। NBEMS का तर्क था कि देश भर में 18,000 से अधिक पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली थीं, जिन्हें भरना जरूरी था। 2025 में कट-ऑफ पर्सेंटाइल घटाने से -40 स्कोर करने वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के तीसरे राउंड में शामिल हो पाए थे।
कट-ऑफ घटाने के विरोध में उठे सवाल: क्या डॉक्टरों की गुणवत्ता गिरेगी?
हालांकि, इस फैसले को लेकर देश भर में कड़ा विरोध हुआ और इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए:
- सुप्रीम कोर्ट का दखल: फरवरी 2026 में, सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल कम करने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार और NBEMS दोनों से इस पर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ताओं – सोशल वर्कर हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी – का तर्क था कि कट-ऑफ कम करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है, और इससे डॉक्टरों की गुणवत्ता गिरेगी।
- यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट एसोसिएशन (UDF) का विरोध: मेडिकल प्रोफेशनल्स के अधिकारों की वकालत करने वाले UDF ने पिछले साल 0 पर्सेंटाइल कट-ऑफ का कड़ा विरोध किया था। UDF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने इस नोटिफिकेशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी।
- “सीटें भरने का नहीं, बेचने का फॉर्मूला”: एकेडमिक एक्सपर्ट और पंजाब सरकार के एकेडमिक प्रोग्राम का हिस्सा रहे कुणाल सिंह का मानना है कि कट-ऑफ घटाकर 0 पर्सेंटाइल करना सीटें भरने का नहीं, बल्कि ‘बेचने’ का फॉर्मूला है। उनके अनुसार, “सरकारी कॉलेजों में सीटें कम होती हैं और हर टॉप स्कोरर उन्हें अफोर्ड नहीं कर पाता। ऐसे में, कम स्कोर वाला कैंडिडेट मोटी रकम चुकाकर उन सीटों को खरीद सकता है।” कुणाल सिंह ने यह भी बताया कि यह ‘पेड सीट’ का खेल NEET-UG में भी देखने को मिलता है, जहाँ कई छात्र कम अंकों के बावजूद MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: NBEMS के पक्ष में
जनवरी 2026 में, दिल्ली हाईकोर्ट में भी 0 पर्सेंटाइल कट-ऑफ के खिलाफ एक मामला (संचित सेठ बनाम नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज अन्य) आया था। हालांकि, कोर्ट ने योग्यता के मानदंड को कम करने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम और मानकों में गिरावट की बात ‘बेबुनियाद’ है। कोर्ट ने माना कि “फैसला लेने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं थी, जिसके लिए चल रहे काउंसलिंग राउंड में न्यायिक दखल की जरूरत हो।” हालांकि, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का कहना है कि काउंसलिंग के दौरान हमेशा ज्यादा रैंक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
कितनी हैं पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें?
इस साल NEET PG 2026 की काउंसलिंग में पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी NEET PG 2026-27 के सीट मैट्रिक्स के अनुसार, कुल 58,000 MD, MS और डिप्लोमा सीटें उपलब्ध हैं, जो पिछले साल 52,173 थीं। इसके लिए 2,73,096 कैंडिडेट्स ने रजिस्ट्रेशन किया था और 2,65,980 कैंडिडेट्स ने परीक्षा दी थी।
NMC के 29 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक:
- सरकारी मेडिकल कॉलेजों में: 33,088 सीटें
- प्राइवेट कॉलेजों में: 21,892 सीटें
- डीम्ड यूनिवर्सिटी में: 8,197 सीटें
निष्कर्ष
NEET PG में 0 परसेंटाइल कट-ऑफ का मुद्दा मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने और खाली सीटों को भरने की अनिवार्यता के बीच एक जटिल संतुलन को दर्शाता है। जहाँ एक तरफ सीटें भरने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर योग्य और कुशल डॉक्टरों के महत्व को भी नकारा नहीं जा सकता। यह बहस आगे भी जारी रहेगी कि क्या कम कट-ऑफ वास्तव में शिक्षा के मानकों को प्रभावित करता है, या यह केवल एक व्यावहारिक समाधान है जो देश में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद करता है।