दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति योगेश सिंह: शिक्षा में एक दशक का ऐतिहासिक नेतृत्व

दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति योगेश सिंह: एक ऐतिहासिक दूसरे कार्यकाल की शुरुआत

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। प्रो. योगेश सिंह ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर (कुलपति) के रूप में अपना लगातार दूसरा पांच साल का कार्यकाल शुरू कर दिया है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि वे इस प्रतिष्ठित पद पर दोबारा पूरे कार्यकाल के लिए नियुक्त होने वाले पहले भारतीय हैं।

2031 तक DU का नेतृत्व और AICTE की भूमिका

प्रो. योगेश सिंह का दूसरा कार्यकाल अक्टूबर 2031 में पूरा होगा, जिससे वे कुल मिलाकर एक दशक तक दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति बने रहेंगे। यह उनकी प्रभावशाली नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। इसके साथ ही, वे ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के प्रमुख के रूप में भी अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, जिस पद पर वे पिछले साल दिसंबर से हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बड़े बदलाव

प्रो. सिंह का दूसरा कार्यकाल ऐसे महत्वपूर्ण समय में शुरू हुआ है, जब दिल्ली यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कई बड़े बदलावों से गुजर रही है। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना और शिक्षा प्रणाली को और अधिक प्रासंगिक बनाना है। इनमें शामिल हैं:

  • चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) की शुरुआत।
  • पाठ्यक्रम संरचना (Curriculum Structure) में महत्वपूर्ण बदलाव।
  • कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के माध्यम से होने वाले एडमिशन।

नियमों में संशोधन से संभव हुई ऐतिहासिक पुनः नियुक्ति

प्रो. योगेश सिंह की यह ऐतिहासिक दोबारा नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा अक्टूबर 2023 में दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट के नियम 11-F(4) में किए गए संशोधन के कारण संभव हो पाई। पहले इस नियम के तहत वाइस-चांसलर का कार्यकाल केवल पांच साल का होता था और वे दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य नहीं माने जाते थे। हालांकि, संशोधित नियमों के अनुसार, अब मौजूदा वाइस-चांसलर को अगले पांच साल तक के लिए फिर से नियुक्त किया जा सकता है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के अनुसार, ब्रिटिश कानूनविद और एडमिनिस्ट्रेटर सर मॉरिस ग्वायर 1938 से 1950 तक, यानी लगभग 12 साल तक वाइस-चांसलर रहे थे। उनके बाद, इतने लंबे समय तक इस पद पर रहने का अवसर अब प्रो. योगेश सिंह को मिला है। वे DU के 77 साल के इतिहास में दो बार कुलपति बनने वाले पहले भारतीय हैं।

पहले कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ और DU में सुधार

2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद, प्रो. योगेश सिंह के नेतृत्व में DU में कई महत्वपूर्ण सुधार और बदलाव किए गए। इनमें से कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को सफलतापूर्वक लागू करना।
  • चार वर्षीय ग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) को शुरू करना।
  • कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के जरिये एडमिशन प्रक्रिया को अपनाना।
  • डिजिटल प्रशासन और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देना, जिससे प्रशासनिक कार्य अधिक सुगम हुए।
  • नए शैक्षणिक और शोध कार्यक्रमों की शुरुआत, जिससे छात्रों को विविध विषयों में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
  • विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और आधुनिक बनाने पर जोर।

निष्कर्ष

प्रो. योगेश सिंह का दूसरा कार्यकाल दिल्ली यूनिवर्सिटी के लिए एक नई दिशा का संकेत देता है। उनके अनुभवी नेतृत्व में विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने और उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले पांच सालों में उनके मार्गदर्शन में DU कैसे और विकसित होता है।

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