पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों का बड़ा आंदोलन: जानें क्या हैं उनकी मुख्य माँगें और क्यों हुआ प्रदर्शन?

पटना यूनिवर्सिटी, बिहार के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक है, जो इन दिनों छात्रों के एक बड़े आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के नेतृत्व में छात्र अपनी कई मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच बढ़ते गतिरोध को दर्शाता है।

पटना यूनिवर्सिटी छात्र आंदोलन: मुख्य कारण क्या हैं?

छात्रों के इस व्यापक प्रदर्शन के पीछे कई गंभीर मुद्दे हैं, जो उनकी शिक्षा और भविष्य से जुड़े हुए हैं। AISF के छात्रों की मुख्य माँगें और विरोध के कारण निम्नलिखित हैं:

  • LLB प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक: छात्रों का आरोप है कि LLB प्रवेश परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ है, जिससे उनकी मेहनत और भविष्य खतरे में है। वे इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
  • PG पाठ्यक्रमों में फीस में भारी बढ़ोतरी: पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में फीस में की गई अप्रत्याशित वृद्धि ने छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। वे इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं, ताकि सभी वर्गों के छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।
  • MFA (मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स) की पढ़ाई शुरू न होना: विश्वविद्यालय द्वारा MFA कोर्स को अब तक शुरू न किए जाने से कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों को निराशा हुई है। वे जल्द से जल्द इस कोर्स को शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
  • अन्य 10 सूत्री माँगें: AISF ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कुल 10 सूत्री माँगें रखी हैं, जिनमें अकादमिक और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई बिंदु शामिल हैं।

छात्रों ने कैसे जताया अपना विरोध?

अपनी मांगों को मनवाने के लिए छात्रों ने कई तरीकों से विरोध प्रदर्शन किया है:

  • अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल: छात्र पिछले 4 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिसकी वजह से कुछ छात्रों की तबीयत भी बिगड़ रही है। हालांकि, चिकित्सकों की टीम उनकी लगातार जांच कर रही है।
  • विश्वविद्यालय बंद कराने का आह्वान: वार्ता विफल होने के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय के कार्यालयों, कक्षाओं और विभागों को बंद करा दिया। उन्होंने दफ्तरों की लाइटें बंद कर दीं और अकादमिक काउंसिल में ताला लगा दिया।
  • कुलपति का घेराव: छात्रों ने कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह का घेराव भी किया और उनसे अपनी मांगों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की।
  • विरोध मार्च और समर्थन जुटाना: AISF ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के बीच पहुंचकर आंदोलन के लिए समर्थन की अपील की, जिसमें कई अन्य छात्रों ने भी हिस्सा लिया। विरोध मार्च के दौरान छात्रों ने पारंपरिक तरीके से डफली बजाकर भी अपना आक्रोश व्यक्त किया।

कुलपति और प्रशासन का रुख

बुधवार को कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया था। AISF का 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कुलपति कार्यालय पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। हालांकि, यह वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद छात्रों ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी बंद कराने का फैसला लिया।

छात्रों की प्रमुख मांग: कुलपति का इस्तीफा

आंदोलनरत छात्रों ने पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह के इस्तीफे की भी मांग की है। AISF के छात्र देव पाठक ने कहा कि जब जन-जेड आंदोलन पर उतरे तो धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, ऐसे में पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति को भी इस्तीफा देना चाहिए। AISF पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगों पर विचार कर शीघ्र समाधान करने की अपील की और चेताया कि यदि सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

आगे क्या?

फिलहाल, पटना यूनिवर्सिटी में छात्र आंदोलन जारी है। छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और इस गतिरोध का समाधान कब और कैसे निकलता है। छात्रों का यह आंदोलन शिक्षा के अधिकार और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर करता है।

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